राजीव रंजन प्रसाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता, जद(यू)
By — Shyamal Sinha
जद (यू) राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राजीव रंजन प्रसाद ने जारी बयान में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मीडिया में अनर्गल बयानबाजी करने से पहले आरजेडी नेता को तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए। आरजेडी सांसद पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज मीडिया में ज्ञान देने वाले सुधाकर सिंह को फरक्का जल संधि में बिहार की हकमारी की बात उस समय क्यों नहीं आयी जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी ।
आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर 1996 को जब फरक्का जल संधि हुई थी तो उस समय सुधाकर सिंह की पार्टी के नेता लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में संयुक्त मोर्चे की सरकार थी, जिसके लालू प्रसाद यादव प्रभावशाली नेता थे। उस दौरान विदेश मंत्री आई के गुजराल थे जिनसे लालू प्रसाद यादव के अच्छे राजनीतिक संबंध थे। लेकिन लालू प्रसाद यादव ने अपनी आंखों के सामने बिहार के हित की बलि चढ़ने दी और इस संधि के विरोध में एक शब्द भी नहीं बोला ।
उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह को ये पता होना चाहिए कि किसी भी दो देशों की बीच की अंतर्राष्ट्रीय संधि नियमों एवं कानूनी बाध्यताओं के तहत होती है। आरजेडी नेता को अगर इस बात का ज्ञान नहीं है तो उन्हें संविधान की सातवीं अनुसूची को पढ़ना चाहिए, जिसमें किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संधि के पालन के नियमों की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि संविधान में ये वर्णित है कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संधि को बीच में तोड़ा नहीं जा सकता है ।
सुधाकर सिंह पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हमेशा चुप्पी साधे रहने वाले आरजेडी नेता को बिहार के हित बात तब याद आयी जब दिसंबर में इस संधि का नवीकरण होना है और नवीकरण के विरोध में जद (यू) कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद श्री संजय झा ने इस मुद्दे को राज्यसभा में जोर शोर से उठाया । उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि बिहार के हित की बात करने वाले सुधाकर सिंह को क्या इससे पहले बिहार का हक दिखाई नहीं दे रहा था ?
सुधाकर सिंह से सवाल पूछते हुए उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद ने इस संधि के विरोध में उस समय आवाज क्यों नहीं उठाई ? पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि सच्चाई ये है कि उस दौरान लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में अभियुक्त करार दिए चुके थे और जेल जाने के डर से उन्होंने इस संधि का विरोध नहीं किया और बिहार की हकमारी होने दी ।
सुधाकर सिंह को फरक्का बराज के निर्माण के इतिहास को भी याद रखना चाहिए तभी अनर्गल बयानबाजी करनी चाहिए। इस बराज का निर्माण साल 1962 में शुरु हुआ और 1970 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ जबकि 21 अप्रैल साल 1975 में ये बांध क्रियाशील हुआ था जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। आज इंडी गठबंधन की मुख्य पार्टी कांग्रेस से गलबहियां करने वाली आरजेडी को ये सवाल कांग्रेस से पूछना चाहिए कि आखिर बिहार कि अनदेखी कर उन्होंने किस आधार पर ये बराज निर्माण कराने का फैसला लिया? जिसका परिणाम आज बिहार को भोगना पड़ रहा है ।
दूसरी तरफ माननीय नीतीश कुमार ने हमेशा और हर मंच से फरक्का बराज का विरोध किया और कई बार उन्होंने इस बराज के चलते गंगा नदी में जमी गाद की समस्या का मामला उठाया और इस संधि की समीक्षा की बात कही। माननीय नीतीश कुमार ने वैज्ञानिक तरीके से एवं आंकड़ों के आधार पर फरक्का बराज के चलते गंगा नदी में गाद प्रबंधन की बात कई बार बेबाक तरीके से रखी। उन्होंने फरक्का बराज की समीक्षा और मूल समस्या के समाधान की मांग की ।
माननीय नीतीश कुमार के शासनकाल के दौरान बिहार में महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं का फैसला लिया गया। इनमें दुर्गावती जलाशय परियोजना और देश का सबसे लंबा रबर डैम ‘गयाजी डैम’ प्रमुख हैं। बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के लिए बागमती, गंडक, कमला बलान, सिकरहना और मसान नदियों पर नए तटबंध व बांध निर्माण और पुराने बांधों की ऊंचाई बढ़ाने का मास्टर प्लान क्रियान्वित किया जा रहा है। जबकि कोसी नदी पर भी नए उच्चस्तरीय बैराज परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ।
उन्होंने कहा जद (यू) दिसंबर 2026 में खत्म हो रही इस संधि के नवीकरण के विरूद्ध आवाज उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर इस संधि के दोबारा नवीकरण न हो इसको लेकर प्रयास करने का काम करेगा।
सुधाकर सिंह पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में जो लोग सोने की चम्मच की विरासत लेकर आते हैं वो ऐसी ही डींगें हांकने के आदी होते हैं। आरजेडी नेता उसी परंपरा से आते हैं। सुधाकर सिंह को ये बातें याद रखनी चाहिए कि उनके पिता जगदानंद सिंह 15 वर्षों तक बिहार के जल संसाधन मंत्री रहे। अपने मंत्रित्व काल के दौरान सुधाकर सिंह के पिता ने जल संसाधन विभाग को बर्बाद करने काम किया ।